ऐसी बुरी लागी लत
पत्रकारिता में गए रत
शब्दों ने बिगाड़ी गत
झूटी दिखतीं सारी बत.
..अपनों के बदले मत
कोई नहीं लिखता खत
घूरती रहती है छत
Thursday, December 2, 2010
Monday, November 29, 2010
मोबाइल की विल- मत किसी से मिल- सचाई किल
लाता मोबाइल
आता बिल
खाता निल
जाता हिल
गाता दिल।
है कोई माई का लाल-जिसके पास मोबाइल हो और उसने झूठ ना बोला हो। नहीं ना। यही कड़वा सच है- गांधी के देश में इस मशीन की आंधी। हर कोई झूठा-सब कुछ लूटा।
आता बिल
खाता निल
जाता हिल
गाता दिल।
है कोई माई का लाल-जिसके पास मोबाइल हो और उसने झूठ ना बोला हो। नहीं ना। यही कड़वा सच है- गांधी के देश में इस मशीन की आंधी। हर कोई झूठा-सब कुछ लूटा।
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